तुम बीन जाऊँ कहा, के दुनियाँ में आ के कुछ ना फिर चाहा कभी, तुम को चाह के रह भी सकोगे तुम कैसे, हो के मुझ से जुदा हट जायेगी दीवारे, सुन के मेरी सदा आना होगा तुम्हे मेरे लिए, साथी मेरी, सूनी राह के कितनी अकेली सी पहले, थी यही दुनियाँ तुम ने नजर जो मिलाई, बस गयी दुनियाँ दिल को मिली जो तुम्हारी लगन दिए जल गए, मेरी आह से


