बड़ी सूनी सूनी है, जिन्दगी ये जिन्दगी मैं खुद से हूँ यहाँ अजनबी, अजनबी कभी एक पल भी कही ये उदासी दिल मेरा भूले तभी मुस्कुराकर दबे पाँव आ कर दुःख मुझे छूँ ले न कर मुझे से गम मेरे दिल्लगी ये दिल्लगी कभी मैं न सोया, कही मुझ से खोया सुख मेरा ऐसे पता नाम लिखकर कही यूँही रखकर भूले कोई जैसे अजब दुःख भरी हैं ये,बेबसी,बेबसी


