आंसू समझ के क्यों मुझे आंख से तूने गिरा दिया
राजेन्द्र कृष्ण, सलील चौधरी, छाया (1961)
ऐ मेरे दिल कही और चल
शैलेन्द्र, शंकर जयकिशन, दाग (1952)
अंधे जहान के अंधे रास्ते, जाए तो जाए कहा
शैलेन्द्र, शंकर जयकिशन, पतिता (1953)
आँखों में मस्ती शराब की
राजेन्द्र कृष्ण, सलील चौधरी, छाया (1961)
देख ली तेरी खुदाई, बस मेरा दिल भर गया
जयदेव, किनारे किनारे (1963)
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं
शंकर जयकिशन, पतिता (1953)
हम से आया ना गया, तुम से बुलाया ना गया
राजेन्द्र कृष्ण, मदन मोहन, देख कबिरा रोया (1957)
इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा, के मैं एक बादल आवारा
राजेन्द्र कृष्ण, सलील चौधरी, छाया (1961)
जब छाए कभी सावन की घटा, रो रो के ना करना याद मुझे
जलते है जिस के लिए, तेरी आखों के दिये
मजरुह सुलतानपुरी, सचिनदेव बर्मन, सुजाता (1959)
जाए तो जाए कहा, समझेगा कौन यहा
साहिर लुधियानवी, सचिनदेव बर्मन, टॅक्सी ड्रायव्हर (1954)
मैं दिल हूँ एक अरमान भरा
राजेन्द्र कृष्ण, रोशन, अनहोनी
मेरी याद में तुम ना आंसू बहाना
राजा मेहंदी अली खान, मदन मोहन, मदहोश
मोहोब्बत ही ना जो समझे वो जालिम प्यार क्या जाने
सी. रामचंद्र, परछाईयाँ (1952)
फिर वही शाम, वही गम, वही तनहाई है
राजेन्द्र कृष्ण, मदन मोहन, जहां आरा (1964)


