Aise to na dekho / ऐसे तो ना देखो के हम को नशा हो जाए
ऐसे तो न देखो, के हमको नशा हो जाये खूबसूरत सी कोई हमसे खता हो जाये ऐसे तो न देखो... तुम हमें रोको फिर भी हम न रुकें तुम कहो काफिर फिर भी ऐसे झुकें कदम-ए-नाज़ पे इक सजदा अदा हो जाये ऐसे तो न देखो... यूं न हो आँखें रहें काजल घोलें बढ़ के बेखुदी हसीं गेसू खोलें खुल के फिर जुल्फें सियाह काली बला हो जाए ऐसे तो न देखो... हम तो मस्ती में जाने क्या क्या कहें लब-ए-नाज़ुक से ऐसा न हो तुम्हें बेक़रारी का गिला हम से सिवा हो जाये ऐसे तो न देखो...





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